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खाता › बकाया और कितना पुराना

बकाया और एजिंग रिपोर्ट

कुल बकाया बताता है कि कितना पैसा अटका है। एजिंग बताती है कि कितनी चिंता करनी है। दस दिन का ₹50,000 बकाया आम कारोबार है; चार महीने का ₹50,000 बकाया समस्या है।

एजिंग कैसे गिनते हैं

हर बकाया बिल को उसकी उम्र के हिसाब से एक खाने में रखा जाता है: बिल की तारीख से आज तक के दिन।

हर बिल का सिर्फ़ बचा हुआ हिस्सा गिना जाता है। आधा-अधूरा पेमेंट सबसे पुराने बिल को पहले घटाता है, जब तक कस्टमर ने न बताया हो कि वे कौन-सा बिल चुका रहे हैं।

एक उदाहरण

4 नवंबर 2026 को वर्मा ट्रेडर्स पर तीन बिलों का ₹38,500 बकाया है:

बिलतारीखदिनअभी बकाया (₹)खाना
INV/26-27/06120 Jul 20261076,50090 दिन से ज़्यादा
INV/26-27/08818 Sep 20264712,00031–60 दिन
INV/26-27/10422 Oct 20261320,0000–30 दिन

एजिंग की लाइन होगी 20,000 / 12,000 / 0 / 6,500। जुलाई वाला ₹6,500 सबसे पहले माँगना है, भले वह सबसे छोटा हो।

हर चरण में क्या करें

  1. देय तारीख से पहले: कुछ नहीं, या अपनी UPI ID के साथ छोटा-सा "बिल भेजा है" मैसेज।
  2. एक हफ़्ता देर: बिल नंबर के साथ विनम्र WhatsApp रिमाइंडर (देखें पेमेंट रिमाइंडर मैसेज)।
  3. एक महीना देर: स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट भेजें और फ़ोन करें। तारीख तय करें, लिख लें।
  4. 90 दिन से ज़्यादा: उधार बंद करें, बैलेंस लिखित में पक्का कराएँ, और वसूली के बारे में अपने अकाउंटेंट से बात करें। जिस कस्टमर का 90+ वाला खाना बढ़ता जा रहा हो, उसे उधार देते न रहें।

माइक्रो और छोटे सप्लायर के लिए 45 दिन का नियम

अगर आप Udyam पर रजिस्टर्ड माइक्रो या छोटा उद्यम हैं, तो MSMED Act, 2006 (सेक्शन 15) कहता है कि खरीदार को आपको लिखित में तय तारीख तक पेमेंट करना है, और वह तारीख माल या सर्विस स्वीकार करने के दिन से 45 दिन से ज़्यादा नहीं हो सकती। लिखित समझौता न हो तो सीमा 15 दिन है। देर होने पर सेक्शन 16 के तहत खरीदार को रिज़र्व बैंक की बताई बैंक रेट के तीन गुना पर, महीने-दर-महीने चक्रवृद्धि ब्याज देना होता है।

इनकम टैक्स भी खरीदारों को समय पर पेमेंट के लिए दबाता है: माइक्रो या छोटे उद्यम को इस सीमा के बाद किया पेमेंट उसी साल खर्च माना जाता है जिस साल सच में चुकाया गया। यह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 का सेक्शन 43B(h) था और इनकम टैक्स एक्ट, 2025 (1 अप्रैल 2026 से लागू) का सेक्शन 37(2)(g) है। बिलों और रिमाइंडर में अपना Udyam नंबर लिखने से बिज़नेस कस्टमर अक्सर जल्दी पेमेंट करते हैं। ट्रेडर्स को इन नियमों में सीमित छूट ही मिलती है, इसलिए अपने अकाउंटेंट से पूछ लें कि ये आप पर लागू होते हैं या नहीं।

जब कस्टमर 180 दिन तक पेमेंट न करे

GST में, जिस रजिस्टर्ड खरीदार ने इनवॉइस की तारीख से 180 दिन में सप्लायर को पेमेंट नहीं किया, उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस जोड़ना होता है (CGST Act सेक्शन 16(2) का दूसरा प्रोविज़ो, और Rule 37) और पेमेंट करने के बाद वह फिर ले सकता है। यह खरीदार का नियम है, आपका नहीं: आपको अपने इनवॉइस का GST फिर भी देना है। यह एक और वजह है कि बिज़नेस कस्टमर पुराने बिल चुकाना पसंद करते हैं।

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